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भक्ति और सांस्कृतिक एकता का दिया संदेश
सूरत। गुजरात के सूरत शहर में नवरात्रि की महाअष्टमी पर भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। वराछा स्थित मां उमियाधाम मंदिर में आयोजित भव्य महाआरती में 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान हजारों दीपकों की रोशनी से पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा। मंदिर के आसपास स्थित घरों में भी दीप जलाए गए, जिससे पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया।
30 साल पुरानी परंपरा का भव्य आयोजन
मां उमियाधाम मंदिर में महाअष्टमी के अवसर पर महाआरती आयोजित करने की परंपरा पिछले 30 वर्षों से चली आ रही है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता रानी के दर्शन और महाआरती में शामिल होने पहुंचे। महाआरती के दौरान मंदिर परिसर हजारों दीपकों की रोशनी से जगमगा उठा। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। मंदिर के आसपास रहने वाले लोगों ने भी अपने घरों में दीपक जलाकर इस धार्मिक परंपरा में भागीदारी की।
20 हजार से अधिक भक्तों ने की मां की आराधना
महाअष्टमी पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हुए। बड़ी संख्या में भक्त मां उमिया की आराधना के लिए मंदिर पहुंचे। नवरात्रि के अवसर पर मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। महाअष्टमी को देवी महागौरी की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत, पूजा-अर्चना और आरती के माध्यम से माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
हजारों दीपकों से जगमगाया मंदिर परिसर
महाआरती का सबसे आकर्षक दृश्य हजारों दीपकों की रोशनी रहा। मंदिर परिसर के साथ आसपास के घरों में भी दीप जलाए गए। इससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और भक्ति का वातावरण बन गया। मां उमियाधाम मंदिर में आयोजित यह कार्यक्रम श्रद्धालुओं की सामूहिक आस्था और लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा का प्रतीक बना।
भक्ति और सांस्कृतिक एकता का दिया संदेश
नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी दर्शाता है। मां उमियाधाम की महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इसी भावना को उजागर किया। तीन दशक पुरानी परंपरा के तहत आयोजित महाआरती ने सूरत में नवरात्रि उत्सव की रौनक और बढ़ा दी।
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